अब सड़कों पर भीख मांगने वाले बच्चों, महिलाओं और बड़ों की जिंदगी बदलने की कोशिश शुरू हो गई है। जिला समाज कल्याण विभाग ने तय किया है कि इन्हें भी समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जाएगा। इसके लिए उन्हें रहने की जगह, पढ़ाई और कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में शहर के चौक, बाजार और बस स्टेशनों पर भीख मांगने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। अब इन्हें सरकार की “स्माइल योजना” के तहत नया जीवन देने की तैयारी है। सबसे पहले नगर क्षेत्रों में सर्वे किया जाएगा, जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि कौन-कौन लोग सड़क पर भीख मांगते हैं और क्यों।
इनमें से जो लोग रहने के लिए जगह चाहते हैं, उन्हें आश्रय स्थलों (shelter homes) में रखा जाएगा। वहाँ उन्हें भोजन, कपड़े, बिस्तर और इलाज की सुविधा मिलेगी। बच्चों का नजदीकी स्कूलों में दाखिला कराया जाएगा ताकि वे पढ़-लिखकर अपना भविष्य बना सकें।
वहीं जो लोग काम करने में सक्षम हैं, उन्हें कौशल विकास केंद्रों में प्रशिक्षण देकर फैक्ट्रियों या कंपनियों में नौकरी दिलाई जाएगी। चार सामाजिक संगठनों ने आश्रय स्थल चलाने का प्रस्ताव दिया है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति इनमें से एक संगठन का चयन करेगी।
जिला समाज कल्याण अधिकारी सतीश कुमार के मुताबिक, यह प्रयास जिले में भिक्षा मांगने वालों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगा। अब उनके हाथों में भीख का कटोरा नहीं, बल्कि किताब और हुनर होगा।
