सरकार की तिजोरी में इस समय पैसों का सैलाब इसलिए आया है क्योंकि इस वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल से 10 नवंबर 2025 के बीच सरकार ने करीब 12.92 लाख करोड़ रुपये का डायरेक्ट टैक्स (प्रत्यक्ष कर) इकट्ठा किया है। यह रकम पिछले साल की तुलना में करीब 7 प्रतिशत ज्यादा है। यह पैसा मुख्य रूप से दो हिस्सों से आता है—एक, कॉरपोरेट टैक्स यानी कंपनियों द्वारा चुकाया गया टैक्स, और दूसरा, व्यक्तिगत आयकर यानी आम लोगों की आमदनी पर लगा टैक्स। इस बार कंपनियों के मुनाफे बढ़ने और लोगों की आमदनी में सुधार होने से टैक्स वसूली में बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, टैक्स रिफंड यानी सरकार द्वारा लौटाई जाने वाली रकम भी कम हुई है, जिससे कुल वसूली का आंकड़ा और बड़ा हो गया है। डिजिटल टैक्स सिस्टम और टैक्स चोरी पर सख्ती जैसे कदमों से भी राजस्व में सुधार देखने को मिला है। कुल मिलाकर, बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और बेहतर टैक्स अनुपालन की वजह से सरकार के पास अब योजनाओं और विकास कार्यों में खर्च करने के लिए अधिक धन उपलब्ध हो गया है।
सरकार की तिजोरी भर गई: टैक्स वसूली से मिले 12.92 लाख करोड़ रुपये, पिछले साल से 7% ज्यादा संग्रह
