सीएम योगी के निर्देशों का असर, पराली जलाने के मामलों में आई बड़ी कमी

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों का असर अब जमीन पर साफ दिखने लगा है। प्रदेश में इस साल पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। सरकार ने किसानों को जागरूक करने के लिए कई कदम उठाए थे, जिनका अब सकारात्मक परिणाम मिल रहा है। प्रशासन ने गांव-गांव जाकर किसानों को समझाया कि पराली जलाने से मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती है और प्रदूषण भी बढ़ता है। साथ ही, पराली प्रबंधन के लिए किसानों को मशीनें और सब्सिडी भी उपलब्ध कराई गई।

राज्य सरकार ने कृषि विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन को मिलकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके तहत जो किसान पराली जलाते पकड़े गए, उन पर जुर्माना भी लगाया गया और कई जगह चेतावनी देकर समझाया गया। सरकार ने पराली को खाद और बायो-सीएनजी बनाने में इस्तेमाल करने की भी योजना चलाई, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ मिला।

रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस बार पराली जलाने की घटनाओं में करीब 60 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। जिन जिलों में पहले सबसे ज्यादा पराली जलाई जाती थी, वहां भी इस साल हालात बेहतर हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसानों की सोच में बदलाव आया है और अब वे पराली को बेकार नहीं, बल्कि उपयोगी संसाधन मानने लगे हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा है कि पर्यावरण को बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसान इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि किसानों को सहयोग देने के साथ ही नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। इस तरह, सरकार की नीतियों और किसानों के सहयोग से प्रदेश में स्वच्छ वातावरण की दिशा में यह बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

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