बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में आरजेडी को बड़ा झटका लगा है। तेजस्वी यादव की पार्टी को इस बार भी लगभग उतना ही वोट शेयर मिला है जितना पिछले चुनाव में मिला था। इसके बावजूद इस बार आरजेडी 75 सीटों से घटकर करीब 30 सीटों पर सिमटती दिखाई दे रही है। सवाल ये है कि वोट उतने ही, लेकिन सीटें इतनी कम क्यों?
सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है महिला वोटरों का बीजेपी गठबंधन (एनडीए) की तरफ झुकाव। इस बार बड़ी संख्या में महिलाओं ने मतदान किया, और माना जा रहा है कि उन्होंने तेजस्वी यादव के वादों और अभियानों पर ज़्यादा भरोसा नहीं किया। खासकर लक्ष्मी बाई योजना, उज्ज्वला योजना, और महिलाओं को मिलने वाले सीधे सरकारी लाभ के चलते महिला वोटों का एक बड़ा हिस्सा एनडीए को मिलता दिखा।
दूसरी बात, आरजेडी को जो वोट मिले, वह कई जगहों पर कम मार्जिन से बंट गए। मतलब वोट शेयर तो था, लेकिन सीट जीतने के लिए पर्याप्त नहीं था। मुकाबला कड़ा होने की वजह से थोड़ा-थोड़ा वोट खिसकने से कई सीटें हाथ से निकल गईं।
इसके अलावा कुछ लोगों का मानना है कि तेजस्वी यादव की रैलियों में भीड़ तो दिखी, पर मतों में तब्दील नहीं हो पाई। युवाओं ने कुछ जगहों पर सपोर्ट किया, लेकिन ग्रामीण महिलाओं की बड़ी संख्या ने एनडीए की ओर झुकाव दिखाया, जिसने पूरा परिणाम बदल दिया।
कुल मिलाकर, वोट प्रतिशत भले ही वही रहा, लेकिन महिलाओं का फैसला, सीटों पर अलग-अलग प्रकार की वोटिंग और कड़ी टक्कर में हुए छोटे-छोटे बदलावों ने आरजेडी को नुकसान पहुंचाया। यही वजह है कि पिछले जैसा वोट होने के बावजूद इस बार सीटें काफी कम मिलीं।
