बीजेपी के पास भले ही बिहार में कोई बड़ा स्थानीय नेतृत्व वाला चेहरा नहीं था, लेकिन फिर भी पार्टी ने इस चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की। इसकी कई वजहें हैं। सबसे बड़ा कारण रहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जनता का भरोसा और “डबल इंजन सरकार” का संदेश, जिसे लोगों ने विकास से जोड़कर देखा। महिलाएँ और अति-पिछड़ा वर्ग बड़ी संख्या में बीजेपी-एनडीए के पक्ष में दिखे क्योंकि सरकार ने उन्हें सीधे फायदा देने वाली योजनाएँ चलाईं। दूसरी तरफ विपक्ष में एकजुटता की कमी रही और महागठबंधन मतदाताओं को मजबूत विकल्प देने में कमजोर पड़ गया। नीतीश कुमार के साथ गठबंधन ने बीजेपी को स्थिरता और अनुभवी नेता का सहारा दिया। मतदाता सूची सुधार और बढ़ी हुई मतदान दर ने भी एनडीए को फायदा पहुंचाया। इन सब कारणों से, चेहरे की कमी के बावजूद बीजेपी ने रणनीति, योजनाओं और भरोसे के दम पर बड़ी सफलता हासिल की।
चेहरा नहीं, रणनीति और भरोसे ने दिलाई भाजपा को बिहार में बड़ी जीत
