गुरुग्राम में एक बड़ा रियल एस्टेट फ्रॉड सामने आया है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लालू प्रसाद यादव के करीबी कारोबारी अमित कात्याल को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह मामला Krrish Florence Estate नाम के प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसे गुरुग्राम के सेक्टर 70 में विकसित किया गया था।
ED की जांच में आरोप है कि कात्याल की कंपनी Angle Infrastructure Pvt Ltd ने बिना पुख्ता लाइसेंस के घर खरीदारों से भारी रकम जमा की। इसके बाद इस धन को “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” के रूप में लगभग ₹300 करोड़ तक डायवर्ट किया गया।
ED ने बताया है कि इस घोटाले की शुरुआत “फ्रॉडulent बुकिंग” से हुई — उन्होंने खरीददारों को आकर्षक फ्लैट्स दिखाकर पैसे लिए, लेकिन बिल्डिंग अधूरी रही। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि कात्याल ने लाइसेंस मिलने से पहले ही होमबायर्स से वसूली शुरू कर दी थी।
गिरफ्तारी से पहले, कात्याल पहले भी ED की रडार पर था। 2023 में उसे रेलवे घोटाले (Land-for-Jobs स्कैम) में भी गिरफ्तार किया गया था, जिसमें लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और अन्य परिवारिक सदस्यों का नाम था।
इसके अलावा, ED का यह भी दावा है कि कात्याल की कंपनियों ने ₹500 करोड़ से अधिक की धनराशि होमबायर्स को फ्रॉड के माध्यम से वसूली थी, और उसके कुछ हिस्से को शेल कंपनियों में भेजा गया था।
गौरतलब है कि कुछ धनराशि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भेजी गई—ED का आरोप है कि लगभग ₹205 करोड़ को श्रीलंका के एक प्रोजेक्ट में डायवर्ट किया गया।
विशेष अदालत ने गुरुग्राम में कात्याल को छह दिनों के लिए ED हिरासत में भेजा है, ताकि एजेंसी गहराई से पूछताछ कर सके और अन्य सबूतों की तफ्तीश कर सके।
यह गिरफ्तारी राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर बड़ी हलचल मचा सकती है। कात्याल की गिरफ्तारी लालू यादव परिवार के आसपास लंबे समय से चल रही जांचों को और अधिक जोर दे सकती है, खासकर जब यह मनी लॉन्ड्रिंग और होमबायर्स को धोखा देने जैसे गहरे आरोपों से जुड़ी है।
