जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी की हार को लेकर एक गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि चुनाव “rigged” थे, लेकिन उन्होंने यह भी माना है कि अभी तक उनके पास इस दावे को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है।
किशोर ने India Today TV के इंटरव्यू में बताया कि उनकी टीम ने महीनों तक जन सुराज यात्रा के दौरान जो प्रतिक्रिया और समर्थन देखा, वोटिंग ट्रेंड उसमें फिट नहीं बैठता। उन्होंने कहा कि “कुछ गड़बड़ हुआ लगता है” और इसके पीछे “कहीं कोई अदृश्य ताकतें” काम कर रही थीं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव में महिलाओं को नकद वितरण किया गया। किशोर का कहना है कि NDA ने हजारों महिलाओं को पहले 10,000 रुपये दिए और वोट देने के बाद उन्हें 2 लाख रुपये तक का वादा किया गया था। हालांकि, किशोर यह स्पष्ट करते हैं कि यह उनकी धारणा है और उन्होंने इसे “अलिज़ेशन” कहा, क्योंकि अभी तक उनका दावा साबित करने के लिए कोई वैधानिक दस्तावेज़ या सबूत सामने नहीं आया है।
प्रशांत किशोर ने अपने बयान में हार के लिए पूरी जिम्मेदारी ली है। उन्होंने कहा कि जन सुराज ने बहुत ईमानदारी से अभियान चलाया, लेकिन “जनता का भरोसा” जीतने में असफल रहे। इस आस्था की कमी की वजह से ही उनके अनुसार जन सुराज का “राजनीतिक प्रयोग” विफल रहा।
गौरतलब है कि किशोर ने हार के बाद 20 नवंबर को एक दिन का मौन उपवास रखने की घोषणा की थी, जिसे उन्होंने अपनी “अन्तर्मंथन और प्रायश्चित” का हिस्सा बताया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कोई वोट-खरीद, जाति-धर्म विभाजन या कोई अपराध नहीं किया — उनकी रणनीति “शुद्ध राजनीतिक बदलाव” पर आधारित थी।
निष्कर्षतः, प्रशांत किशोर का कहना है कि चुनाव में गड़बड़ जरूर हुई, लेकिन फिलहाल उसके प्रमाण नहीं हैं। उन्होंने यह फैसला लिया है कि अपनी अगली रणनीति पर फिर काम करेंगे और जनता के भरोसे को दोबारा जीतने का प्रयास जारी रखेंगे।
