बिहार की राजनीति में इस बार दो संजय की कहानी महाभारत जैसी बन गई है। एक हैं संजय झा (JDU के), और दूसरे संजय यादव (RJD के)।
पहले संजय झा की “हार” इसलिए बताई गई क्योंकि चुनावी प्रतिस्पर्धा में उनकी पार्टी के प्रबंधन या रणनीति पूरी तरह सफल नहीं रही — वे बड़े निर्णयों में सक्रिय रहे, लेकिन उनके फ़ैसलों का उल्टा असर दिखा।
वहीं, दूसरा संजय — संजय यादव — ने चुनावी मैदान में “जबरदस्त प्रहार” किया है। वह तेजस्वी यादव के करीबी सलाहकार माने जाते हैं और उनकी रणनीतियाँ RJD के लिए बहुत ताकतवर साबित हो रही हैं।
तो यानि, बिहार की यह “महाभारत” सिर्फ एक लड़ाई नहीं, बल्कि दो जोर‑दार रणनीतिकारों की टक्कर है — जिसमें एक संभलने में चूक गया, और दूसरा पूरा दांव लगा रहा।
