सरकार ने शनिवार को कैबिनेट बैठक में एक बड़ा प्रस्ताव रखा, जिसमें मनरेगा (MGNREGA) योजना का नाम बदलने की बात सामने आई। जैसे ही यह प्रस्ताव सामने आया, मीडिया और सोशल मीडिया पर तुरंत चर्चा शुरू हो गई। सरकार ने बताया कि मनरेगा का नया नाम “पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना” रखने पर विचार हो रहा है। इस नाम में “पूज्य बापू” शब्द जोड़कर महात्मा गांधी को सम्मान देने की बात कही गई है।
मनरेगा देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना है, जो साल 2005 में शुरू हुई थी और ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन के काम की गारंटी देती है। सरकार का कहना है कि नाम बदलने से योजना को नई पहचान मिलेगी और इसे ग्रामीण विकास से और मजबूती से जोड़ा जा सकेगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना बंद नहीं होगी, सिर्फ नाम बदला जाएगा, बाकी काम और लाभ पहले की तरह जारी रहेंगे।
नाम बदलने का प्रस्ताव आते ही राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई। कुछ लोग इसे सकारात्मक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे गैर-ज़रूरी बदलाव मान रहे हैं। लेकिन अचानक चर्चा इसलिए शुरू हुई क्योंकि कैबिनेट में यह प्रस्ताव पहली बार आधिकारिक रूप से पेश किया गया, और मीडिया ने इसे प्रमुख खबर के रूप में चलाया, जिससे यह देशभर में चर्चा का विषय बन गया।
