भारतीय रुपया जब डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो इसका असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल पर भी सीधा प्रभाव पड़ता है। दरअसल, नेपाल की मुद्रा नेपाली रुपया भारतीय रुपये से जुड़ी (पेग्ड) हुई है। नेपाल ने 1 भारतीय रुपया = 1.60 नेपाली रुपया की स्थिर दर तय कर रखी है। ऐसे में जब भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिरता है, तो नेपाली रुपया भी अपने-आप कमजोर हो जाता है।
इस कमजोरी का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि नेपाल को आयात महंगा पड़ता है। नेपाल पेट्रोल-डीजल, गैस, दवाइयां, मशीनें और कई जरूरी सामान विदेशों से मंगाता है, जिनका भुगतान डॉलर में होता है। रुपया कमजोर होने से इन चीजों की कीमत बढ़ जाती है, जिससे नेपाल में महंगाई बढ़ती है।
इसके अलावा नेपाल के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। डॉलर महंगा होने से भुगतान करना मुश्किल हो जाता है। पर्यटन और विदेशों में काम करने वाले नेपाली नागरिकों से आने वाला पैसा (रेमिटेंस) कुछ राहत देता है, लेकिन बढ़ते आयात खर्च के सामने यह पर्याप्त नहीं होता।
कुल मिलाकर, भारतीय रुपया कमजोर होने का असर नेपाल की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, जिससे वहां महंगाई, व्यापार घाटा और आर्थिक दबाव बढ़ जाता है।
