राजस्थान के अलवर जिले से अवैध खनन को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि अरावली की पहाड़ियों से सटे सीमावर्ती इलाकों में जैसे ही शाम ढलती है और अंधेरा होता है, वैसे ही अवैध खनन का खेल शुरू हो जाता है। दिन में शांत दिखने वाले इलाके रात के समय भारी मशीनों और ट्रकों की आवाज़ से गूंजने लगते हैं। यह गतिविधियां न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा बन रही हैं, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, रात के समय बिना किसी वैध अनुमति के पत्थर, बजरी और अन्य खनिजों की खुदाई की जाती है। ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपरों के जरिए खनिजों को तेजी से दूसरे इलाकों में भेज दिया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस अवैध कारोबार में प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता है, जिसके कारण शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो पाती। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और पुलिस को सूचना दी, लेकिन कुछ दिनों की सख्ती के बाद फिर वही हालात बन जाते हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली क्षेत्र में अवैध खनन से भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, जंगलों को नुकसान पहुंच रहा है और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। इसके अलावा भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीण इलाकों में सड़कें खराब हो रही हैं और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसके दूरगामी और विनाशकारी परिणाम सामने आ सकते हैं।
प्रशासन की ओर से दावा किया गया है कि अवैध खनन के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि GRAP-4 जैसे पर्यावरणीय नियमों के तहत सख्ती बढ़ाई गई है और दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के समय निगरानी लगभग न के बराबर होती है, जिसका फायदा माफिया उठाते हैं।
फिलहाल, यह मामला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। सवाल यह है कि क्या अवैध खनन पर वास्तव में लगाम लग पाएगी या फिर अंधेरा होते ही यह खेल यूं ही चलता रहेगा।
