रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया दो बड़े धड़ों (पश्चिम बनाम रूस-चीन) में बँटी हुई नजर आती है, और भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के साथ संतुलन बना रहा है। इस यात्रा में भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग, कच्चे तेल का व्यापार, नई तकनीक, और सामरिक साझेदारी पर बड़े फैसले होने की उम्मीद है। रूस भारत को S-400 जैसे रक्षा सिस्टम दे चुका है, इसलिए सुरक्षा से जुड़ा यह रिश्ता भारत के लिए बहुत भरोसेमंद माना जाता है। इसके अलावा, भारत रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे भारत को सस्ता ईंधन मिला और अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ।
विदेशी मीडिया में कहा जा रहा है कि यह यात्रा दिखाएगी कि भारत किसी एक गुट का हिस्सा बने बिना अपने हितों को आगे रख रहा है। कई विश्लेषकों का मानना है कि भारत-रूस की यह मुलाकात एक मल्टीपोलर (बहु-ध्रुवीय) दुनिया की तरफ इशारा करती है, जहाँ सत्ता सिर्फ पश्चिम के हाथ में न होकर कई देशों में बँटी रहे। पश्चिमी मीडिया यह भी लिख रहा है कि यह दौरा भारत के “डिप्लोमैटिक बैलेंसिंग एक्ट” यानी कूटनीतिक संतुलन की परीक्षा होगा, लेकिन साथ ही यह भी माना जा रहा है कि भारत और रूस के रिश्ते विश्वास और जरूरत पर आधारित हैं, इसलिए दोनों देश सहयोग को और गहरा करने की कोशिश करेंगे।
कुल मिलाकर, यह यात्रा भारत को ऊर्जा सुरक्षा, मजबूत रक्षा साझेदारी और वैश्विक कूटनीति में एक स्थिर साथी देती है, इसलिए इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
