योगी सरकार ने लखनऊ समेत कई जिलों में जमीनों के सर्किल रेट का पुनरीक्षण कराने का फैसला किया है। जिन जिलों में वर्षों से सर्किल रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है, वहां इसे प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य बाजार मूल्य के अनुरूप सर्किल रेट तय करना है, जिससे राजस्व में वृद्धि हो और संपत्तियों का सही मूल्यांकन हो सके।
1 जनवरी 2024 से अब तक 37 जिलों में सर्किल रेट का पुनरीक्षण पूरा हो चुका है। शेष जिलों में भी जल्द यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार का मानना है कि सर्किल रेट में संशोधन से जमीन खरीदने-बेचने वालों को पारदर्शिता मिलेगी और स्टांप शुल्क से होने वाली आमदनी भी बढ़ेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई जिलों में मौजूदा सर्किल रेट बाजार मूल्य से काफी कम हैं, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। नई दरें लागू होने के बाद संपत्तियों की खरीद-बिक्री में संतुलन आएगा और अवैध लेन-देन पर भी अंकुश लगेगा।
सरकार यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी करेगी और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए सर्किल रेट तय किए जाएंगे। इससे न केवल सरकारी आय बढ़ेगी, बल्कि आम लोगों को भी संपत्ति खरीदने और बेचने में अधिक स्पष्टता मिलेगी।
